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सर्दियों में ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज रखें विशेष ध्यान

तापमान में गिरावट होने से हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज की संभावना में होती है बढ़ोत्तरी

पटना, (संवाददाता):  जिले में ठंड और कुहासों के कारण तापमान में तेजी से गिरावट हो रही है। ठंड बढ़ने के कारण जहां सांस की बीमारियों से ग्रसित मरीजों की मुश्किलें बढ़ती हैं, वहीं सर्द हवाओं और ठिठुरन की वजह से लोगों में ब्लड प्रेशर प्रभावित हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार ठंड के मौसम का हृदय रोगों से गहरा संबंध होता है। सर्दी की वजह से हृदय व रक्त संचार प्रभावित होते है। ठंडे मौसम की वजह से दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल में रक्त और ऑक्सीजन का संचार कम होने लगता है। इससे हाइपरटेंशन और दिल के रोगों वाले मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। ठंडे मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है। इस मौसम में दिल और उच्च रक्तचाप के रोगियों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. विभा सिंह ने बताया दिसंबर से जनवरी के दौरान अस्पतालों में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। इस दौरान एक्यूट हार्ट अटैक, उक्त रक्तचाप, ब्रेन हैमरेज आदि के मामले 20 से 25 पर्सेंट तक बढ़ जाते हैं। सबसे अधिक उन बुजुर्गों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है, जो पहले से हार्ट के मरीज हैं। जब बॉडी को गर्मी की जरूरत होती है, तो हार्ट को ज्यादा काम करना पड़ता है। इससे अटैक या स्ट्रोक का खतरा रहता है। दूसरी ओर, सर्दियों में सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और शरीर में कैटेकोलामिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो धड़कनों को बढ़ाकर ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है। सिविल सर्जन ने बताया जो लोग मधुमेह के मरीज हैं उनकी परेशानी भी सर्दियों में ज्यादा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में लोग पानी भी कम पीते हैं। एक तरह से जीवनशैली बदल जाती है। लोग मीट, मछली, घी ज्यादा खाते हैं और शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। इसकी वजह से शुगर लेवल बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बादाम और पिस्ते का सेवन हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है। ग्रीन टी का सेवन भी उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। सर्दियों में उचित मात्रा में धूप सेंकना बेहद जरूरी है। विटामिन डी के साथ आपको अपने खानपान में हरी सब्जियों को भी शामिल करना चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम और संतुलित व पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। जो ऐसी समस्याओं की आशंका को काफी कम कर देते हैं।

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