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आतंकवाद का जवाब है लोकतंत्र: संजय जायसवाल 

पटना, (संवाददाता): कश्मीर और अफगानिस्तान में हुई आतंकी घटनाओं पर क्षोभ प्रकट करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने फेसबुक के जरिए आतंक के पैरोकारों को जमकर लताड़ लगायी। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि आज दुनिया में एक नये तरह के मानसिक विक्षिप्त पैदा हो गये हैं जिन्होने अकेले जन्नत जाने के चक्कर में पूरी दुनिया को दोज़ख में तब्दील कर दिया है। कश्मीर में मारे गए हिंदू और अफगानिस्तान में मारे गए मुसलमान इसी सोच का नतीजा है। उदहारण देते हुए उन्होंने लिखा कि जहां हम कम रहेंगे वहां भाईचारा और कौमी एकता की बात करेंगे पर अगर ये मानसिक विक्षिप्त उस देश में घटना कर देते हैं तो हम उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे( भारत, अमेरिका, यूरोप)। जहां ज्यादा हो जाएंगे तो सैकड़ों साल से साथ रह रहे भाई को चारा बनाकर खा जाएंगे। यहां भी 90% शरीफ लोग अपना मुंह बंद रखेंगे(कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश,लेबनान)। अगर यह चारा खत्म हो गया तो अपने ही कौम में अहमदिया और अन्य को खोज कर उन्हें समाप्त करके जन्नत चले जाएंगे(पाकिस्तान)। उन्होंने लिखा कि अगर ये सारे भी समाप्त हो गए तो 1400 साल का हिसाब आज चुकता कर जन्नत जाएंगे (अफगानिस्तान, इराक, यमन)। अगर यह भी खत्म हो गए तो मजार पर जाने वाले अपने लोगों को खत्म कर जन्नत का रास्ता पकड़ लेंगे (शाह नूरानी मजार, पाकिस्तान)। अगर इन्हें भी खत्म कर दिया तो हमारे में जो दाढ़ी मूछ नहीं रखेगा उसे खत्म करेंगे, लेकिन अकेले जन्नत जरूर जाएंगे (अफ्गानिस्तान)। वैसे मेरे दिमाग में एक बात आ रही है, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान, उनका आर्मी चीफ जनरल बाजवा, आईएसआई का पुराना चीफ फैज़ हमीद और नया आईएसआई चीफ नदीम अंजुम सभी ने दाढ़ी मूछ नहीं रखी है। कोई भरोसा नहीं है कि कब तालिबान अपना आदेश यहीं से शुरू करे दे। आतंक को अमेरिका की ऊपज बताते हुए उन्होंने लिखा कि आधुनिक विश्व में यह पूरी धर्मांधता अमेरिका की देन है जिसने 80 के दशक मे अफगानिस्तान में रूसी फौजियों का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तानी मदरसे जाकर जिहाद के लिए उकसाया। उसके पहले मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा के केंद्र हुआ करते थे पर अमेरिकी डॉलर और हथियारों ने इनकी मूल रचना समाप्त कर दी। उसी समय से पूरे विश्व में कट्टरता फैलती गई । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा कि दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया में सैकड़ों करोड़ रुपए देने की बात तब कट्टरपंथियों ने कही थी। शर्त बस इतनी थी की 87 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया को सार्वजनिक स्थान से मूर्तियां हटानी होंगी। उस समय के राष्ट्रपति ने साफ कह दिया कि हमने धर्म बदला है पूर्वज नहीं बदले और आज भी राष्ट्रपति भवन के सामने वाले गोल चक्कर पर कृष्ण अर्जुन की गीता उपदेश देते हुए मूर्ति है । पांचों वक्त नमाज पढ़ने वाले इस देश में जब मैं राष्ट्रपति भवन गया तो सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति मिली। भीतर पांच हॉल हैं और उनके नाम युधिष्ठिर भीम अर्जुन नकुल सहदेव कक्ष थे। ये किसी भी मूर्ति की पूजा नहीं करते पर इन्हें अपना पूर्वज अवश्य मानते हैं। उन्होंने लिखा कि यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया में आज भी कट्टरता सर उठा नहीं पायी है। सभी धर्मों के लोग शांतिपूर्वक सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपना जीवन यापन करते हैं। हम सभी के पूर्वज एक हैं और सभी को एक साथ रहना है, इस बोध के साथ ही हम देश को मजबूत कर सकते हैं। वरना हमारे देश का 1000 वर्षों का इतिहास यही रहा है कि हमें समाप्त करने के लिए विदेशी नहीं हमारे देश के ही कुछ लोग काफी हैं । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा कि विगत 2 दिनों में कश्मीर में हिंदू और अफगानिस्तान मस्जिद में मारे गए मुसलमान एक ही सोच की देन है। इस सोच को पूरे विश्व को एक साथ मिलकर हर हालत में समाप्त करना ही होगा। ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम की 11 वीं बैठक में कल चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दुनिया को आतंकवाद पर दोहरे मापदंड को छोड़ने की सलाह दी ।उन्होंने कहा कि अच्छे और बुरे आतंकवाद जैसा कोई भेद नहीं होता । आतंकवाद की तुलना जंगली बाघ से करते हुए कहा कि यह पालने वाले को भी खाता है। उम्मीद है कि वांग यी अपने शब्दों का पालन स्वयं पर अवश्य करेंगे। डॉ. जायसवाल ने लिखा कि यह बात केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान की नहीं है। सीरिया, इराक, यमन, नाइजीरिया जैसे अनेक देशों मे भी जो कुछ हो रहा है वह अमेरिका और रूस की इन देश के नेताओं पर अपनी पकड़ बनाने की होड़ का नतीजा है। इन सबका जवाब केवल सभी देशों में लोकतंत्र की स्थापना है। अगर सारी शक्ति आम जनता के पास समाहित हो तो वे देश को स्वयं ठीक कर लेंगे। भारत, अमेरिका ,फ्रांस जैसे कई देश इसका उदाहरण है जहां अनेकों आतंकवादी हमले होने के बाद भी सौहार्द पूर्ण वातावरण में सभी रहते हैं।

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